वेतन वृद्धि रोके जाने का विरोध

वेतन वृद्धि रोके जाने का विरोध

हिमाचल स्कूल प्रवक्ता संघ के राज प्रधान केसर ठाकुर,महासचिव संजीव ठाकुर,कार्यकारी प्रधान राम।कृष्ण मार्कण्डेय,नरोत्तम ठाकुर,सतीश शर्मा,अशोक ठाकुर,राजेश सैनी, गिरीश ठाकुर,विपिन माहिल,बलदेव शर्मा,रणवीर ठाकुर,धीरज व्यास,विनोद   बनायल,राजगीर,विजय शर्मा,कमल शर्मा ,पंकज शर्मा,प्रदीप शर्मा ,मुख्य प्रेस सचिव राजेन्द्र शर्मा, जिला के सभी ज़िला प्रधानों,सदस्यों और पदाधिकारियों ने प्रेस के नाम जारी एक वक्तव्य में शिक्षा विभाग के उस फैसले का कड़ा विरोध किया है जिसमें बिना स्पष्टीकरण लिए और मौका दिए ही शिक्षकों की वेतनवृद्धि रोकने की बात की है। प्राध्यापक संघ का कहना है कि परीक्षा परिणाम कम आने के दूसरे कारण भी हैं और विभाग को सभी कारणों का पता लगाकर परिक्षा परिणाम के लिए सही नीति बनानी चाहिए। आठवी तक फेल न करने की नीति का खामयाजा आठवी से अगली कक्षाओं में भुगतना पड़ता है । बहुत से स्कूलों में खाली पद परीक्षा के रहते भर दिए जाते है।शिक्षा अधिकारियों द्वारा एक महीने में परिक्षा परिणाम बदल जाने की अपेक्षा करना गलत है। मिड सेशन में शिक्षको के तबादले कर दिए जाते है जिस से परीक्षा परिणाम पर विपरीत असर पड़ता है।शिक्षको से पूरा साल गैर शिक्षण कार्य जैसे चुनाव ड्यूटी,बीच सत्र में शिक्षकों के सेमिनार व परिशिक्षण करवाये जाते है जिस से छात्रों की पढ़ाई बाधित होती है।आये दिन स्कूलों में महत्वपूर्ण दिवस ,आला अधिकारियों के प्रोग्राम आयोजित किये जाते है जिस से शिक्षण दिवस कम हो जाते है।विभाग की अन्य गतिविधियों, मूलभूत ढांचे की कमी इत्यादि कारण भी खराब परीक्षा परिणाम के लिए उत्तरदायी हैं। इन सभी कारणों पर अध्यनन करके ही सही परीक्षा परिणाम नीति बनानी चाहिए।किसी शिक्षक का परिणाम कई साल अच्छा रहता है और एक साल काम आता है तो शिक्षक को अयोग्य मान लेना गलत है।जिनका परिक्षा परिणाम इस बार कम आया है उन्हें एक मौका और दिया जाए और तुरंत सभी शिक्षको की  वेतन वृद्धि को जारी किया जाए

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