जिला बिलसपुर के शिक्षक संगठन हुए एकजुट 

जिला बिलसपुर के शिक्षक संगठन हुए एकजुट 
 आज जिला बिलासपुर के विभिन्न शिक्षक संगठनो ने संयक्त रूप से बैठक की जिसमे हिमाचल प्रिंसिपल एवं निरीक्षण संवर्ग के पधाधिकारी ओंकार वर्मा,कुलदीप डोगरा,अरुण गौतम,सुरेंदर पाल शर्मा , हिमाचल प्रदेश स्कूल प्रवक्ता संघ  के प्रधान नरेश  ठाकुर व महासचिव जगदीश कौंडल  ,भूपेन्द्र ठाकुर ,सतीश शर्मा,हिमाचल पदोन्नत प्रवक्ता संघ के प्रधान संजीव कुमार शर्मा ,महासचिव
प्रवीण चंदेल ,नन्द लाल ,परस राम,यश पल रनौत,हिमाचाल प्रदेश वज्ञान संघ के प्रधान राजेंदर कुमार ,सचिव अवनीश कुमार ,विनोद कुमार ,हिमाचल टी जी टी आर्ट्स एसोशिएशन के प्रधान दिग्विजय,सचिव राकेश चैधरी, राज्य महासचिव अखिलेश,प्रवीण चंदेल,  व  प्राथमिक शिक्षक संघ आदि  सहित 7  शिक्षक संगठन शामिल रहे |सभी पधाकारियों ने संयुक्त  बयान देते हुए  सरकार से मांग की है कि
हिमाचल प्रदेश में भूतपूर्व सैनिकों के मामले में माननीय सर्वोच्च न्यायालय के फैसले को 1997 से लागू किया जाए| इस फैलसे की अनुसार वरिष्ठता सूची अति शीघ्र 1997 से पुनर्निर्धारित  की जाए.|  सर्वोच्च न्यायालय ने 25 अगस्त 2017 को हिमाचल प्रदेश के पूर्व सैनिकों को सेना के सेवाकाल की सिविल सर्विसेज में जो वरिष्ठता नियम 5(1) के अधीन दी जाती है, उसे असंवैधानिक करार दिया है। इसलिए सरकार से सभी संगठनों ने पुरजोर मांग की है कि पूर्व सैनिकों को दी जाने वाली यह वरिष्ठता तत्काल प्रभाव से समाप्त की जाए। क्योंकि जिस नियम के आधार पर यह वरिष्ठता प्रदान की जा रही है, सर्वोच्च न्यायालय ने उसे ही असंवैधानिक ठहराया हुआ है। अत: यह वरिष्ठता सूची फिर से निर्धारित की जाए। सरकार जो इस निर्णय को 2008 से इसे लागू करने जा रही है वह तर्कसंगत नहीं है क्योंकि  भूतपूर्व सैनिकों को दी जाने वाली वरिष्ठता का  यह नियम माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा असंवैधानिक करा दिया है इसलिए जिस तिथि से भूतपूर्व सैनिकों को यह वरिष्ठता दी गई है उसी तिथी  से इसका पुनर्निर्धारण किया जाना चाहिए। इस केस में शिक्षक  संघठनो ने मिलकर  20 साल तक लड़ाई लड़ी है |सभी शिक्षक संगठन भूतपूर्व सैनिको को मिलने वाले अन्य लाभों  का समर्थन करते है मगर वरिष्ठता देने सिविल में सेवा कर रहे लगभग  3 लाख कर्मचारियो को को सीधा 2 नुकसान हो रहा है | सिविल कर्मचारियों को 20-25 साल तक पदोन्नति से वंचित रहना पड़ रहा है |8 साल सेवाकाल वाला भूतपूर्व सैनिक 25 साल का सेवाकाल पूर्ण कर चुके सिविल कर्मचारी से अधिक वरिष्ठता पाता है।इस नियम के खिलाफ 1997 में हिमाचल प्रदेश के उच्च न्यायलय में केस किया था। भूतपूर्व सैनिक भावानात्मक तरीक से सरकार को उलझा रही है |भूतपूर्व सैनिको को भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान रखना चाहिए,सैनिक सबसे
ज्यादा अनुशाषित माने जाते है ,अगर भूतपूर्व सैनिक न्यायलय का सम्मान नहीं करेंगे तो आम आदमी के उपर क्या असर पडेगा इसका अंदाजा खुद्द ही लगाया  सकता है | इसके अलावा बैठक में फैसला लिया कि विभिन्न अध्यापक संगठन अपने जिले में सरकार के प्रतिनिधियों को ज्ञापन देंगे |

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *